Meta Layoffs 2025

टेक दिग्गज Meta (Facebook की पेरेंट कंपनी) ने एक बार फिर छंटनी की घोषणा की है। इस बार असर पड़ा है कंपनी की AI Superintelligence Division पर, जहाँ लगभग 600 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर तेजी से निवेश बढ़ रहा है, लेकिन Meta का यह कदम कई सवाल खड़े कर रहा है —
क्या Meta की AI रणनीति कमजोर हो रही है?
या फिर यह कंपनी की नई बिज़नेस दिशा का हिस्सा है?
⚙️ क्या है Meta की AI Superintelligence टीम?
Meta की “AI Superintelligence” टीम की स्थापना 2023 में की गई थी। इस टीम का लक्ष्य था —
अगली पीढ़ी की General AI (AGI) टेक्नोलॉजी बनाना,
AI मॉडल्स को ChatGPT और Gemini जैसे सिस्टम्स से आगे ले जाना,
और मेटा को AI innovation का global leader बनाना।
इस टीम में दुनिया के टॉप AI रिसर्चर्स शामिल थे, जिन्होंने पहले OpenAI, Google DeepMind और Anthropic जैसी कंपनियों में काम किया था।
लेकिन अब, अचानक से इस टीम से सैकड़ों लोगों की विदाई ने सभी को चौंका दिया है।
🧩 छंटनी के पीछे की वजहें — क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
Meta ने आधिकारिक बयान में कहा है कि यह “strategic restructuring” है।
लेकिन अंदरूनी सूत्रों के अनुसार इसके पीछे कई बड़ी वजहें हैं:
1️⃣ AI प्रोजेक्ट्स का ओवरलैप
मेटा के पास कई AI टीम्स हैं — जैसे FAIR (Fundamental AI Research), GenAI, Reality Labs AI, और Superintelligence Lab।
इनके बीच प्रोजेक्ट्स की दिशा और रिसर्च ओवरलैप होने लगी थी। कंपनी चाहती है कि संसाधन (resources) एक ही दिशा में लगें, इसलिए कुछ टीमों को मर्ज या बंद किया जा रहा है।
2️⃣ कास्ट कटिंग (Cost Cutting)
Meta पहले ही 2023 और 2024 में Reality Labs में अरबों डॉलर खर्च कर चुका है।
AI रिसर्च महँगा सौदा है — सर्वर, क्लाउड, GPU और ह्यूमन टैलेंट सबका खर्च भारी होता है।
Mark Zuckerberg की टीम अब कम खर्च में ज्यादा आउटपुट चाहती है।
3️⃣ AI इनोवेशन पर रीफोकस
कंपनी अब अपनी ऊर्जा GenAI Tools, AI चैटबॉट्स, और Meta Llama मॉडल्स पर केंद्रित करना चाहती है।
इसलिए Superintelligence टीम का कुछ हिस्सा अन्य विभागों में रीडिप्लॉय (स्थानांतरित) किया गया है।
💬 मार्क ज़ुकेरबर्ग का बयान
“हम अपनी AI स्ट्रैटेजी को और केंद्रित कर रहे हैं ताकि हम Llama मॉडल्स और सोशल मीडिया AI इंटीग्रेशन पर अधिक काम कर सकें। कुछ बदलाव कठिन हैं, लेकिन यह हमें भविष्य के लिए मजबूत बनाएंगे।”
इस बयान से साफ है कि छंटनी कंपनी के दीर्घकालिक लक्ष्य का हिस्सा है, न कि अचानक लिया गया फैसला।
👨💻 कर्मचारियों पर असर
Meta के 600 प्रभावित कर्मचारियों में से ज़्यादातर यू.एस., यू.के., और यूरोप में स्थित हैं।
इनमें डेटा साइंटिस्ट, मशीन लर्निंग इंजीनियर, रिसर्च साइंटिस्ट और डेवलपर्स शामिल हैं।
कंपनी ने सभी को तीन महीने का सेवरेन्स पैकेज, हेल्थ इंश्योरेंस, और नई नौकरी खोजने में सहायता देने का वादा किया है।
हालांकि, कई कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराज़गी जताई —
“हमने भविष्य के लिए कुछ बड़ा बनाने का सपना देखा था, लेकिन अब हमें खुद अपने भविष्य की चिंता है।”
🌍 AI इंडस्ट्री में छंटनी का नया दौर
Google DeepMind ने 200 कर्मचारियों को हटाया,
Microsoft ने AI Ethics टीम को री-स्ट्रक्चर किया,
और Amazon ने Alexa AI यूनिट से सैकड़ों कर्मचारियों को निकाल दिया।
इससे साफ है कि AI इंडस्ट्री में अब “efficiency over expansion” का दौर शुरू हो चुका है।
कंपनियां अब कम टीम के साथ ज्यादा काम करना चाहती हैं।
📊 मेटा की फाइनेंशियल स्थिति
Meta ने हाल ही में अपने Q3 2025 earnings report में बताया कि —
कंपनी की कुल आय 24% बढ़ी है,
लेकिन Reality Labs में घाटा अब भी जारी है (करीब $3.6 बिलियन),
और AI रिसर्च पर सालाना खर्च $10 बिलियन से अधिक है।
इन आंकड़ों से समझा जा सकता है कि Meta लागत घटाने के लिए मजबूर है।
मार्क ज़ुकेरबर्ग की “Year of Efficiency” रणनीति अब भी लागू है, जिसका असर छंटनियों के रूप में दिख रहा है।
🤖 AI का भविष्य — Meta की अगली चाल क्या होगी?
1. Llama 4 मॉडल का विकास (ChatGPT का सीधा प्रतिद्वंदी)
2. Instagram और Facebook में AI चैटबॉट्स का विस्तार
3. Metaverse में AI अवतार सिस्टम्स
4. AI वीडियो जनरेशन टूल्स
इन सभी पर कंपनी अब तेज़ी से काम कर रही है, और माना जा रहा है कि 2026 तक Meta अपने AI इकोसिस्टम को पूरी तरह पुनर्गठित कर लेगा।
🧠 विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
AI विशेषज्ञों के अनुसार —
“Meta का यह फैसला अल्पकालिक झटका जरूर है, लेकिन लंबी अवधि में इससे कंपनी का फोकस बेहतर होगा।”
हालांकि, आलोचक कहते हैं कि —
“AI Superintelligence टीम को बंद करना Meta के लिए एक गलत कदम है, क्योंकि भविष्य की प्रतिस्पर्धा यहीं से तय होगी।”
🧩 भारत पर असर
Meta की भारतीय इकाई में अभी तक किसी छंटनी की पुष्टि नहीं हुई है।
लेकिन भारत में काम कर रहे कई AI डेवलपर्स और मार्केटिंग टीम्स इस खबर से चिंतित हैं।
भारत मेटा के लिए एक सबसे बड़ा सोशल मीडिया बाजार है, इसलिए यहां बड़े स्तर पर छंटनी की संभावना कम है।
क्या Meta का फैसला सही दिशा में है?
मेटा की छंटनी यह दिखाती है कि दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियाँ भी AI प्रयोगों से सीखे सबक निकाल रही हैं।
हर कंपनी अब “growth at any cost” की बजाय “smart growth” की ओर बढ़ रही है।
Meta ने शायद अभी एक कठिन लेकिन आवश्यक कदम उठाया है।
भविष्य में यह रणनीति कामयाब होगी या नहीं — यह आने वाला साल बताएगा।
फिलहाल इतना तय है कि AI की दुनिया में स्थिरता की जगह अब दक्षता (efficiency) ने ले ली है।

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